श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.84.15 
गुरुदारप्रसक्तेषु तिर्यग्योनिगतेषु च।
पशुधर्मेषु पापेषु म्लेच्छेषु त्वं भविष्यसि॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तुम उन पापी म्लेच्छों के राजा होगे जो अपने गुरुजनों की पत्नियों में आसक्त रहते हैं, पशु-पक्षियों के समान आचरण करते हैं तथा जिनके विचार और आचरण भी पशुओं के समान हैं ॥15॥
 
You will be the king of those sinful mlecchas who are attached to the wives of their teachers, who behave like animals and birds, and whose thoughts and behavior are also like those of animals. ॥15॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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