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mahabharat 1.84.13: ययाति बोले, "तुर्वसो! मेरे हृदय से उत्पन्न होने पर भी तुमने मुझे अपनी जवानी नहीं दी, अतः तुम्हारी संतान नष्ट हो जाएगी।"   |   mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.84.13 
ययातिरुवाच
यत् त्वं मे हृदयाज्जातो वय: स्वं न प्रयच्छसि।
तस्मात् प्रजा समुच्छेदं तुर्वसो तव यास्यति॥ १३॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले, "तुर्वसो! मेरे हृदय से उत्पन्न होने पर भी तुमने मुझे अपनी जवानी नहीं दी, अतः तुम्हारी संतान नष्ट हो जाएगी।"
 
Yayati said, "Turvaso! Even though you were born from my heart, you did not give me your youth, therefore your progeny will be destroyed."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)