Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.84.12: तुर्वसु बोले- पिताश्री! मैं ऐसा बुढ़ापा नहीं चाहता जो कामसुख का नाश कर दे। वह बल और सौन्दर्य का नाश कर दे, तथा बुद्धि और प्राण का भी नाश कर दे॥ 12॥ | mahabharat अध्याय 1.84: ययातिका अपने पुत्र यदु, तुर्वसु, द्रुह्यु और अनुसे अपनी युवावस्था देकर वृद्धावस्था लेनेके लिये आग्रह और उनके अस्वीकार करनेपर उन्हें शाप देना, फिर अपने पुत्र पूरुको जरावस्था देकर उनकी युवावस्था लेना तथा उन्हें वर प्रदान करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तुर्वसुरुवाच
न कामये जरां तात कामभोगप्रणाशिनीम्।
बलरूपान्तकरणीं बुद्धिप्राणप्रणाशिनीम्॥ १२॥
अनुवाद
तुर्वसु बोले- पिताश्री! मैं ऐसा बुढ़ापा नहीं चाहता जो कामसुख का नाश कर दे। वह बल और सौन्दर्य का नाश कर दे, तथा बुद्धि और प्राण का भी नाश कर दे॥ 12॥
Turvasu said— Father! I do not want old age which destroys sexual pleasure. It destroys strength and beauty and also destroys intellect and life force.॥ 12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥