Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.83.d5-35: हे ब्रह्मन्! मेरा यह व्रत है कि जो मुझसे कुछ भी माँगेगा, मैं उसे अवश्य दूँगा। आपने मुझे जो शर्मिष्ठा सौंपी थी, वह इस संसार में किसी अन्य पुरुष को अपना पति नहीं बनाना चाहती थी। अतः मैंने उसकी इच्छा पूरी करना अपना कर्तव्य समझकर ऐसा किया है। इसके लिए मुझे क्षमा करें। हे भृगु! इन्हीं सब कारणों का विचार करते हुए मैं अधर्म के भय से व्याकुल होकर शर्मिष्ठा के पास गया। | mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(यद् यद् याचति मां कश्चित् तत् तद् देयमिति व्रतम्।
त्वया च सापि दत्ता मे नान्यं नाथमिहेच्छति॥
मत्वैतन्मे धर्म इति कृतं ब्रह्मन् क्षमस्व माम्।)
इत्येतानि समीक्ष्याहं कारणानि भृगूद्वह।
अधर्मभयसंविग्न: शर्मिष्ठामुपजग्मिवान्॥ ३५॥
अनुवाद
हे ब्रह्मन्! मेरा यह व्रत है कि जो मुझसे कुछ भी माँगेगा, मैं उसे अवश्य दूँगा। आपने मुझे जो शर्मिष्ठा सौंपी थी, वह इस संसार में किसी अन्य पुरुष को अपना पति नहीं बनाना चाहती थी। अतः मैंने उसकी इच्छा पूरी करना अपना कर्तव्य समझकर ऐसा किया है। इसके लिए मुझे क्षमा करें। हे भृगु! इन्हीं सब कारणों का विचार करते हुए मैं अधर्म के भय से व्याकुल होकर शर्मिष्ठा के पास गया।
O Brahman! It is my vow that whatever anyone asks from me, I will certainly give it to him. Sharmishtha, who was handed over to me by you, did not want to make any other man her husband in this world. Therefore, I have done so considering it my duty to fulfill her wish. Please forgive me for this. O great Bhrigu! Thinking about all these reasons, I went to Sharmishtha, troubled by the fear of wrongdoing.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥