श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक d2-19
 
 
श्लोक  1.83.d2-19 
देवयान्युवाच
(अभ्यागच्छति मां कश्चिदृषिरित्येवमब्रवी:।
ययातिमेव नूनं त्वं प्रोत्साहयसि भामिनि॥
पूर्वमेव मया प्रोक्तं त्वया तु वृजिनं कृतम्।)
मदधीना सती कस्मादकार्षीर्विप्रियं मम।
तमेवासुरधर्मं त्वमास्थिता न बिभेषि मे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली— भामिनी! तुम तो कहती थीं कि कोई ऋषि मेरे पास आते हैं। इसी बहाने तुम राजा ययाति को अपने पास आने के लिए उकसाती रहती थीं। मैंने तो तुम्हें पहले ही बता दिया था कि तुमने कोई पाप किया है। शर्मिष्ठा! मेरे वश में होकर भी तुमने ऐसा आचरण क्यों किया जो मुझे बुरा लगा? तुम फिर वही राक्षसी आचरण करने लगी हो। क्या तुम्हें मुझसे तनिक भी भय नहीं लगता?॥19॥
 
Devayani said— Bhamini! You used to say that some sage used to come to me. Using this excuse, you kept encouraging King Yayati to come to you. I had already told you that you have committed some sin. Sharmishtha! Why did you behave in a way that I found offensive even after being under my control? You have again resorted to the same demon-like behavior. Are you not even afraid of me?॥19॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd