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वैशम्पायन उवाच
अन्योन्यमेवमुक्त्वा तु सम्प्रहस्य च ते मिथ:।
जगाम भार्गवी वेश्म तथ्यमित्यवजग्मुषी॥ ८॥
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - जनमेजय! इस प्रकार आपस में बातें करके दोनों हँस पड़े। देवयानी को लगा कि शर्मिष्ठा ठीक कह रही है, इसलिए वह चुपचाप महल में चली गई।
Vaishmpayana says - Janamejaya! Both of them laughed after talking to each other in this manner. Devayani felt that Sharmishtha was right; hence she quietly went to the palace.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥