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mahabharat 1.83.5: देवयानी बोली - भीरु ! यदि ऐसी बात है तो बहुत अच्छा है। क्या तुम्हें उस ब्राह्मण के वंश, नाम और कुल के विषय में कुछ जानकारी मिली है? मैं उन्हें जानना चाहती हूँ॥5॥   |   mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.83.5 
देवयान्युवाच
शोभनं भीरु यद्येवमथ स ज्ञायते द्विज:।
गोत्रनामाभिजनतो वेत्तुमिच्छामि तं द्विजम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली - भीरु ! यदि ऐसी बात है तो बहुत अच्छा है। क्या तुम्हें उस ब्राह्मण के वंश, नाम और कुल के विषय में कुछ जानकारी मिली है? मैं उन्हें जानना चाहती हूँ॥5॥
 
Devyani said - Bhiru! If this is the case then it is very good. Have you got any information about the lineage, name and family of that Brahmin? I want to know them.॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)