ययातिरुवाच
राज्यभाक् स भवेद् ब्रह्मन् पुण्यभाक् कीर्तिभाक् तथा।
यो मे दद्याद् वय: पुत्रस्तद् भवाननुमन्यताम्॥ ४०॥
अनुवाद
ययाति बोले - ब्रह्मन् ! मेरा जो पुत्र मुझे अपनी जवानी देगा, वह न केवल पुण्य और यश का भागी होगा, अपितु मेरे राज्य का भी भागी होगा। कृपया इसे स्वीकार करें ॥40॥
Yayati said - Brahman! The son of mine who gives me his youth will not only be a sharer in virtue and fame, but will also be a sharer in my kingdom. Please approve of this. ॥ 40॥