श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.83.40 
ययातिरुवाच
राज्यभाक् स भवेद् ब्रह्मन् पुण्यभाक् कीर्तिभाक् तथा।
यो मे दद्याद् वय: पुत्रस्तद् भवाननुमन्यताम्॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
ययाति बोले - ब्रह्मन् ! मेरा जो पुत्र मुझे अपनी जवानी देगा, वह न केवल पुण्य और यश का भागी होगा, अपितु मेरे राज्य का भी भागी होगा। कृपया इसे स्वीकार करें ॥40॥
 
Yayati said - Brahman! The son of mine who gives me his youth will not only be a sharer in virtue and fame, but will also be a sharer in my kingdom. Please approve of this. ॥ 40॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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