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mahabharat 1.83.39: शुक्राचार्य बोले, "हे भूमिपाल, मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। तुम वृद्ध हो गए हो, किन्तु मैं तुम्हें यह सुविधा दे रहा हूँ कि यदि तुम चाहो तो किसी दूसरे से युवावस्था लेकर यह वृद्धावस्था उसके शरीर में स्थानांतरित कर सकते हो।" 39   |   mahabharat अध्याय 1.83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 39
 
 
श्लोक  1.83.39 
शुक्र उवाच
नाहं मृषा ब्रवीम्येतज्जरां प्राप्तोऽसि भूमिप।
जरां त्वेतां त्वमन्यस्मिन् संक्रामय यदीच्छसि॥ ३९॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले, "हे भूमिपाल, मैं झूठ नहीं बोल रहा हूँ। तुम वृद्ध हो गए हो, किन्तु मैं तुम्हें यह सुविधा दे रहा हूँ कि यदि तुम चाहो तो किसी दूसरे से युवावस्था लेकर यह वृद्धावस्था उसके शरीर में स्थानांतरित कर सकते हो।" 39
 
Shukracharya said, "O Bhumipal, I am not lying. You have become old, but I am giving you this facility that if you want, you can take youth from someone else and transfer this old age into his body." 39
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)