श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.83.28 
देवयान्युवाच
अधर्मेण जितो धर्म: प्रवृत्तमधरोत्तरम्।
शर्मिष्ठयातिवृत्तास्मि दुहित्रा वृषपर्वण:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली- पिताश्री! अधर्म ने धर्म को जीत लिया है। नीच लोग आगे बढ़े हैं और श्रेष्ठ लोग नीचे गिरे हैं। वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा मुझे लांघकर आगे बढ़ी है॥ 28॥
 
Devayani said— Father! Adharma has conquered dharma. The lowly have progressed and the high have declined. Sharmishtha, daughter of Vrishparva, crossed me and moved ahead.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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