vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 1: आदि पर्व
»
अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना
»
श्लोक 27
श्लोक
1.83.27
सा तु दृष्ट्वैव पितरमभिवाद्याग्रत: स्थिता।
अनन्तरं ययातिस्तु पूजयामास भार्गवम्॥ २७॥
अनुवाद
अपने पिता को देखते ही वह उन्हें प्रणाम करके उनके सामने खड़ी हो गई। तत्पश्चात राजा ययाति ने भी शुक्राचार्य को प्रणाम किया।
As soon as she saw her father, she bowed before him and stood before him. Thereafter King Yayati also offered his respects to Shukracharya.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas