श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.83.23 
वैशम्पायन उवाच
श्रुत्वा तस्यास्ततो वाक्यं देवयान्यब्रवीदिदम्।
राजन् नाद्येह वत्स्यामि विप्रियं मे कृतं त्वया॥ २३॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं- शर्मिष्ठा के ये वचन सुनकर देवयानी बोली- 'हे राजन! मैं अब यहाँ नहीं रहूँगी। आपने मेरा बड़ा अपकार किया है।'॥23॥
 
Vaishmpayana says- On hearing these words of Sharmishtha, Devayani said- 'O King! I will not stay here anymore. You have done me a great disservice.'॥ 23॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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