श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.83.14 
देवयान्युवाच
किं नामधेयं वंशो व: पुत्रका: कश्च व: पिता।
प्रब्रूत मे यथातथ्यं श्रोतुमिच्छामि तं ह्यहम्॥ १४॥
 
 
अनुवाद
देवयानी ने पूछा - बच्चो! तुम्हारे कुल का नाम क्या है? तुम्हारे पिता कौन हैं? मुझे ठीक-ठीक बताओ। मैं तुम्हारे पिता का नाम सुनना चाहती हूँ॥ 14॥
 
Devyani asked - Children! What is the name of your clan? Who is your father? Tell me this precisely. I want to hear your father's name.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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