श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.83.13 
देवयान्युवाच
कस्यैते दारका राजन् देवपुत्रोपमा: शुभा:।
वर्चसा रूपतश्चैव सदृशा मे मतास्तव॥ १३॥
 
 
अनुवाद
देवयानी ने पूछा - हे राजन! दिव्य बालकों के समान शुभ लक्षणों वाले ये पुत्र किसके हैं? तेज और सौन्दर्य में ये मुझे आपके ही समान प्रतीत होते हैं॥13॥
 
Devayani asked - O King! Whose are these sons with auspicious characteristics like the divine boys? In brilliance and beauty, they appear to me to be like you.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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