श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 83: देवयानी और शर्मिष्ठाका संवाद, ययातिसे शर्मिष्ठाके पुत्र होनेकी बात जानकर देवयानीका रूठकर पिताके पास जाना, शुक्राचार्यका ययातिको बूढ़े होनेका शाप देना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.83.11 
तत: काले तु कस्मिंश्चिद् देवयानी शुचिस्मिता।
ययातिसहिता राजञ्जगाम रहितं वनम्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
राजा! तत्पश्चात् किसी समय पवित्र और मुस्कुराती हुई देवयानी ययाति के साथ एकांत वन में चली गयी।
 
King! Thereafter at some point the pure and smiling Devayani went to a secluded forest with Yayati.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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