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श्लोक 1.83.11  |
तत: काले तु कस्मिंश्चिद् देवयानी शुचिस्मिता।
ययातिसहिता राजञ्जगाम रहितं वनम्॥ ११॥ |
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| अनुवाद |
| राजा! तत्पश्चात् किसी समय पवित्र और मुस्कुराती हुई देवयानी ययाति के साथ एकांत वन में चली गयी। |
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| King! Thereafter at some point the pure and smiling Devayani went to a secluded forest with Yayati. |
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