Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.81.d4: तुम्हारा कल्याण हो। इस शर्मिष्ठा को एकांत में बुलाओ, उससे न तो बात करो और न ही उसके शरीर को छुओ। अब इससे विवाह करके इसे अपनी पत्नी बना लो। इससे तुम्हें मनोवांछित फल मिलेगा। | mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
(रहस्येनां समाहूय न वदेर्न च संस्पृशे:।
वहस्व भार्यां भद्रं ते यथाकाममवाप्स्यसि॥ )
अनुवाद
तुम्हारा कल्याण हो। इस शर्मिष्ठा को एकांत में बुलाओ, उससे न तो बात करो और न ही उसके शरीर को छुओ। अब इससे विवाह करके इसे अपनी पत्नी बना लो। इससे तुम्हें मनोवांछित फल मिलेगा।
May you be blessed. Call this Sharmishtha in solitude and neither talk to her nor touch her body. Now marry her and make her your wife. This will give you the desired result.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥