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mahabharat 1.81.7: उसकी सुन्दरता अद्वितीय थी। वह सुन्दरी उन स्त्रियों के बीच में बैठी थी और शर्मिष्ठा उसके चरणों की सेवा कर रही थी।   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.81.7 
रूपेणाप्रतिमां तासां स्त्रीणां मध्ये वराङ्गनाम्।
शर्मिष्ठया सेव्यमानां पादसंवाहनादिभि:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
उसकी सुन्दरता अद्वितीय थी। वह सुन्दरी उन स्त्रियों के बीच में बैठी थी और शर्मिष्ठा उसके चरणों की सेवा कर रही थी।
 
Her beauty was unmatched. The beautiful lady was sitting in the middle of those women and her feet were being served by Sharmishtha. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)