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mahabharat 1.81.36: वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! शुक्राचार्य की यह बात सुनकर राजा ययाति ने उनकी परिक्रमा की और विधिपूर्वक शुभ विवाह सम्पन्न किया।   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  1.81.36 
वैशम्पायन उवाच
एवमुक्तो ययातिस्तु शुक्रं कृत्वा प्रदक्षिणम्।
शास्त्रोक्तविधिना राजा विवाहमकरोच्छुभम्॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं: जनमेजय! शुक्राचार्य की यह बात सुनकर राजा ययाति ने उनकी परिक्रमा की और विधिपूर्वक शुभ विवाह सम्पन्न किया।
 
Vaishmpayana says: Janamejaya! Upon hearing Shukracharya say this, King Yayati circled around him and performed the auspicious marriage ceremony as per the prescribed rituals.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)