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mahabharat 1.81.31: शुक्राचार्य बोले - हे नहुषनंदन के वीर पुत्र! मेरी प्रिय पुत्री ने आपको पति रूप में वरण किया है, अतः आप मेरी दी हुई इस कन्या को अपनी रानी के रूप में स्वीकार करें।   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.81.31 
शुक्र उवाच
वृतोऽनया पतिर्वीर सुतया त्वं ममेष्टया।
गृहाणेमां मया दत्तां महिषीं नहुषात्मज॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले - हे नहुषनंदन के वीर पुत्र! मेरी प्रिय पुत्री ने आपको पति रूप में वरण किया है, अतः आप मेरी दी हुई इस कन्या को अपनी रानी के रूप में स्वीकार करें।
 
Shukracharya said - O brave son of Nahushanandan! My beloved daughter has chosen you as her husband; therefore, accept this girl given by me as your queen.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)