श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.81.28 
वैशम्पायन उवाच
त्वरितं देवयान्याथ संदिष्टं पितुरात्मन:।
सर्वं निवेदयामास धात्री तस्मै यथातथम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं - राजन! इस प्रकार देवयानी ने तुरन्त ही अपनी धाय को अपने पिता के पास संदेश पहुँचाने के लिए भेजा। धाय ने जाकर शुक्राचार्य को सब बातें विस्तारपूर्वक बता दीं।
 
Vaishampayana says - King! In this manner Devayani immediately sent her nurse to convey the message to her father. The nurse went and told Shukracharya everything in detail.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)