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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.81.24 
देवयान्युवाच
कथमाशीविषात् सर्पाज्ज्वलनात् सर्वतोमुखात्।
दुराधर्षतरो विप्र इत्यात्थ पुरुषर्षभ॥ २४॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली, 'हे महात्मन! आपने यह कैसे कहा कि ब्राह्मण विषैले सर्प और चारों ओर से प्रज्वलित अग्नि से भी अधिक भयंकर और भयानक है?'
 
Devayani said, 'O great man! How did you say that a Brahmin is more fierce and dreadful than a poisonous serpent and a fire blazing from all sides?'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)