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देवयान्युवाच
द्वाभ्यां कन्यासहस्राभ्यां दास्या शर्मिष्ठया सह।
त्वदधीनास्मि भद्रं ते सखा भर्ता च मे भव॥ १७॥
अनुवाद
देवयानी बोली, "हे राजन! आप धन्य हों। मैं अपनी दो हज़ार पुत्रियों और दासी शर्मिष्ठा सहित आपकी शरण में हूँ। आप मेरे मित्र और पति बनें।"
Devayani said— O King! May you be blessed. I, along with my two thousand daughters and my maid Sharmishtha, surrender to you. You become my friend and husband.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥