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श्री महाभारत
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पर्व 1: आदि पर्व
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अध्याय 81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह
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श्लोक 15
श्लोक
1.81.15
देवयान्युवाच
केनास्यर्थेन नृपते इमं देशमुपागत:।
जिघृक्षुर्वारिजं किंचिदथवा मृगलिप्सया॥ १५॥
अनुवाद
देवयानी ने पूछा - महाराज ! आप वन के इस भाग में क्यों आये हैं ? क्या आपको जल चाहिए या कमल चाहिए या केवल शिकार करने ही यहाँ आये हैं ?॥15॥
Devayani asked - Maharaj! Why have you come to this part of the forest? Do you want water or lotus or have you come here only to hunt?॥ 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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