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mahabharat 1.81.10: यह राक्षसराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा मेरी सखी और दासी है। विवाह के बाद मैं जहाँ भी जाऊँगा, यह भी वहीं जाएगी॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.81: सखियोंसहित देवयानी और शर्मिष्ठाका वन-विहार, राजा ययातिका आगमन, देवयानीकी उनके साथ बातचीत तथा विवाह   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  1.81.10 
इयं च मे सखी दासी यत्राहं तत्र गामिनी।
दुहिता दानवेन्द्रस्य शर्मिष्ठा वृषपर्वण:॥ १०॥
 
 
अनुवाद
यह राक्षसराज वृषपर्वा की पुत्री शर्मिष्ठा मेरी सखी और दासी है। विवाह के बाद मैं जहाँ भी जाऊँगा, यह भी वहीं जाएगी॥10॥
 
This Sharmishtha, daughter of the demon king Vrishaparva, is my friend and maid. Wherever I go after my marriage, she will also go there.॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)