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mahabharat 1.80.d4: कुल की भलाई के लिए एक व्यक्ति का त्याग करो। गाँव की भलाई के लिए एक परिवार का त्याग करो। जिले की भलाई के लिए एक गाँव की उपेक्षा करो और स्वयं की भलाई के लिए सम्पूर्ण संसार का त्याग करो।   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक d4
 
 
श्लोक  1.80.d4 
(त्यजेदेकं कुलस्यार्थे ग्रामस्यार्थे कुलं त्यजेत्।
ग्रामं जनपदस्यार्थे आत्मार्थे पृथिवीं त्यजेत्॥ )
 
 
अनुवाद
कुल की भलाई के लिए एक व्यक्ति का त्याग करो। गाँव की भलाई के लिए एक परिवार का त्याग करो। जिले की भलाई के लिए एक गाँव की उपेक्षा करो और स्वयं की भलाई के लिए सम्पूर्ण संसार का त्याग करो।
 
For the good of the family, sacrifice a person. For the good of the village, abandon a family. For the good of the district, neglect a village and for the good of the self, abandon the whole world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)