Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.d1h-4: हे राजन! अंगिरा का पौत्र कच शुद्ध ब्राह्मण है। वह स्वाध्याय में तत्पर, हितैषी, क्षमाशील, अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला, स्वभावतः निष्पाप और धर्म को जानने वाला है। वह उन दिनों मेरे घर में रहता था और निरन्तर मेरी सेवा में लगा रहता था, किन्तु आपने उसे बार-बार मरवा डाला। | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
हे राजन! अंगिरा का पौत्र कच शुद्ध ब्राह्मण है। वह स्वाध्याय में तत्पर, हितैषी, क्षमाशील, अपनी इन्द्रियों को वश में रखने वाला, स्वभावतः निष्पाप और धर्म को जानने वाला है। वह उन दिनों मेरे घर में रहता था और निरन्तर मेरी सेवा में लगा रहता था, किन्तु आपने उसे बार-बार मरवा डाला।
‘O King! Angira's grandson Kacha is a pure Brahmin. He is devoted to studies, is a well wisher, is forgiving, has controlled his senses, is naturally sinless and has knowledge of Dharma. He was living in my house in those days and was constantly engaged in my service, but you got him killed repeatedly.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥