Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.7-8: भृगु नंदन! मुझे नहीं मालूम कि मैंने कभी आप पर अधर्म या झूठ बोलने का आरोप लगाया है या नहीं। आपमें धर्म और सत्य सदैव प्रतिष्ठित रहते हैं। अतः आप हम पर कृपा करें और प्रसन्न हों। भार्गव! यदि आप हमें छोड़ देंगे, तो हम सब भवसागर में खो जाएँगे; हमारे लिए और कोई मार्ग नहीं है। 7-8। | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भृगु नंदन! मुझे नहीं मालूम कि मैंने कभी आप पर अधर्म या झूठ बोलने का आरोप लगाया है या नहीं। आपमें धर्म और सत्य सदैव प्रतिष्ठित रहते हैं। अतः आप हम पर कृपा करें और प्रसन्न हों। भार्गव! यदि आप हमें छोड़ देंगे, तो हम सब भवसागर में खो जाएँगे; हमारे लिए और कोई मार्ग नहीं है। 7-8।
Bhrigu Nandan! I do not know if I have ever accused you of wrongdoing or speaking lies. Righteousness and truth are always established in you. Therefore, be kind to us and be pleased. Bhaargava! If you leave us, then we will all be lost in the ocean; there is no other way for us. 7-8.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥