Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.6: हे राक्षसराज! यह बड़े आश्चर्य की बात है कि तुमने मुझे झूठा समझा है। इसीलिए तुम अपना यह दोष दूर नहीं कर रहे हो और उपेक्षा कर रहे हो॥6॥ | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अहो मामभिजानासि दैत्य मिथ्याप्रलापिनम्।
यथेममात्मनो दोषं न नियच्छस्युपेक्षसे॥ ६॥
अनुवाद
हे राक्षसराज! यह बड़े आश्चर्य की बात है कि तुमने मुझे झूठा समझा है। इसीलिए तुम अपना यह दोष दूर नहीं कर रहे हो और उपेक्षा कर रहे हो॥6॥
‘O demon king! It is very surprising that you have considered me a liar. That is why you do not remove this fault of yours and are showing negligence.'॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥