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mahabharat 1.80.26: देवयानी बोली- पिताश्री! अब मैं नगर में प्रवेश करूँगी। हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! अब मुझे विश्वास हो गया है कि आपकी विद्या और बुद्धि की शक्ति अमोघ है।   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.80.26 
देवयान्युवाच
प्रविशामि पुरं तात तुष्टास्मि द्विजसत्तम।
अमोघं तव विज्ञानमस्ति विद्याबलं च ते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
देवयानी बोली- पिताश्री! अब मैं नगर में प्रवेश करूँगी। हे श्रेष्ठ ब्राह्मण! अब मुझे विश्वास हो गया है कि आपकी विद्या और बुद्धि की शक्ति अमोघ है।
 
Devyani said— Father! Now I will enter the city. O great Brahmin! Now I am convinced that the power of your knowledge and wisdom is infallible.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)