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mahabharat 1.80.25: वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! जब वृषपर्वा की पुत्री ने दासी बनने का वचन दिया, तब देवयानी ने अपने पिता से कहा ॥25॥   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.80.25 
वैशम्पायन उवाच
प्रतिश्रुते दासभावे दुहित्रा वृषपर्वण:।
देवयानी नृपश्रेष्ठ पितरं वाक्यमब्रवीत्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - नृपश्रेष्ठ! जब वृषपर्वा की पुत्री ने दासी बनने का वचन दिया, तब देवयानी ने अपने पिता से कहा ॥25॥
 
Vaishampayanji says – Nripashrestha! When Vrishparva's daughter pledged to be a maid, Devayani said to her father. 25॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)