Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.24: शर्मिष्ठा बोली, "हमें अपने दुःखी भाइयों को हर संभव तरीके से सुख पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए, जहाँ भी तुम्हारे पिता तुम्हें ले जाएँगे, मैं तुम्हारे साथ चलूँगी।" | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शर्मिष्ठा बोली, "हमें अपने दुःखी भाइयों को हर संभव तरीके से सुख पहुँचाने का प्रयास करना चाहिए। इसलिए, जहाँ भी तुम्हारे पिता तुम्हें ले जाएँगे, मैं तुम्हारे साथ चलूँगी।"
Sharmishtha said, "We should try to bring happiness to our distressed brothers by whatever means possible. Therefore, I will accompany you wherever your father takes you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥