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mahabharat 1.80.22: शर्मिष्ठा बोली - देवयानी! मैं एक हजार दासियों के साथ आपकी दासी बनकर आपकी सेवा करूंगी और जहाँ भी आपके पिता आपका विवाह करेंगे, वहाँ आपके साथ चलूंगी।   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.80.22 
शर्मिष्ठोवाच
अहं दासीसहस्रेण दासी ते परिचारिका।
अनु त्वां तत्र यास्यामि यत्र दास्यति ते पिता॥ २२॥
 
 
अनुवाद
शर्मिष्ठा बोली - देवयानी! मैं एक हजार दासियों के साथ आपकी दासी बनकर आपकी सेवा करूंगी और जहाँ भी आपके पिता आपका विवाह करेंगे, वहाँ आपके साथ चलूंगी।
 
Sharmishtha said - Devyani! I will serve you as your maid along with a thousand maids and will accompany you to wherever your father marries you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)