शर्मिष्ठोवाच
यं सा कामयते कामं करवाण्यहमद्य तम्।
यद्येवमाह्वयेच्छुक्रो देवयानीकृते हि माम्।
मद्दोषान्मा गमच्छुक्रो देवयानी च मत्कृते॥ २०॥
अनुवाद
शर्मिष्ठा बोली - यदि शुक्राचार्यजी मुझे देवयानी के लिए ही बुला रहे हैं, तो आज से मैं वही करूँगी जो देवयानी चाहेगी। मेरे अपराध के कारण शुक्राचार्यजी न जाएँ और देवयानी भी मेरे कारण अन्यत्र जाने का विचार न करे।
Sharmishtha said - If Shukracharyaji is calling me for Devyani only, then from today onwards I will do whatever Devyani wants. Shukracharyaji should not go because of my offense and Devyani should also not think of going elsewhere because of me.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥