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mahabharat 1.80.19: "पापरहित राजकुमारी! आज देवयानी के अनुरोध पर बाबा शुक्राचार्य अपने शिष्यों और संरक्षकों का परित्याग कर रहे हैं। अतः देवयानी की जो भी इच्छा हो, उसे तुम अवश्य पूर्ण करो।"   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.80.19 
त्यजति ब्राह्मण: शिष्यान् देवयान्या प्रचोदित:।
सा यं कामयते कामं स कार्योऽद्य त्वयानघे॥ १९॥
 
 
अनुवाद
"पापरहित राजकुमारी! आज देवयानी के अनुरोध पर बाबा शुक्राचार्य अपने शिष्यों और संरक्षकों का परित्याग कर रहे हैं। अतः देवयानी की जो भी इच्छा हो, उसे तुम अवश्य पूर्ण करो।"
 
'Sinless princess! Today, on Devyani's request, Baba Shukracharya is abandoning his disciples and patrons. Therefore, you must fulfill whatever Devyani desires.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)