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mahabharat 1.80.18: वैशम्पायन कहते हैं: तब धाय ने शर्मिष्ठा के पास जाकर कहा: 'हे प्रिय शर्मिष्ठा! उठो और अपने भाइयों को सुख पहुँचाओ॥18॥   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.80.18 
वैशम्पायन उवाच
ततो धात्री तत्र गत्वा शर्मिष्ठां वाक्यमब्रवीत्।
उत्तिष्ठ भद्रे शर्मिष्ठे ज्ञातीनां सुखमावह॥ १८॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायन कहते हैं: तब धाय ने शर्मिष्ठा के पास जाकर कहा: 'हे प्रिय शर्मिष्ठा! उठो और अपने भाइयों को सुख पहुँचाओ॥18॥
 
Vaishmpayana says: Then the nurse went to Sharmishtha and said: 'O dear Sharmishtha! Get up and bring happiness to your brethren.॥ 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)