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mahabharat 1.80.17: यह सुनकर वृषपर्वण ने धाय से कहा - हे धाय, तुम उठो, जाकर शीघ्र ही शर्मिष्ठा को बुला लाओ और वह देवयानी की जो भी इच्छा हो, उसे पूर्ण करे।   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  1.80.17 
वृषपर्वोवाच
उत्तिष्ठ त्वं गच्छ धात्रि शर्मिष्ठां शीघ्रमानय।
यं च कामयते कामं देवयानी करोतु तम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
यह सुनकर वृषपर्वण ने धाय से कहा - हे धाय, तुम उठो, जाकर शीघ्र ही शर्मिष्ठा को बुला लाओ और वह देवयानी की जो भी इच्छा हो, उसे पूर्ण करे।
 
On hearing this, Vrishparvana said to the nurse - O nurse, you get up, go and call Sharmishtha quickly and let her fulfill whatever Devayani desires.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)