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mahabharat 1.80.16: देवयानी ने कहा, "मैं चाहती हूं कि शर्मिष्ठा एक हजार कन्याओं के साथ मेरी दासी बनकर रहे और जहां भी मेरे पिता मेरा विवाह करें, वह मेरे साथ वहां जाए।"   |   mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.80.16 
देवयान्युवाच
दासीं कन्यासहस्रेण शर्मिष्ठामभिकामये।
अनु मां तत्र गच्छेत् सा यत्र दद्याच्च मे पिता॥ १६॥
 
 
अनुवाद
देवयानी ने कहा, "मैं चाहती हूं कि शर्मिष्ठा एक हजार कन्याओं के साथ मेरी दासी बनकर रहे और जहां भी मेरे पिता मेरा विवाह करें, वह मेरे साथ वहां जाए।"
 
Devayani said, "I want Sharmishtha to live as my maid along with a thousand girls and she should accompany me to wherever my father marries me."
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)