Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.14: तब देवयानी बोली - "पिताजी! यदि आप राजा के धन के स्वामी हैं, तो आपके ऐसा कहने मात्र से मैं विश्वास नहीं करूँगी। यदि राजा स्वयं ऐसा कहें, तो मैं विश्वास करूँगी।" | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयान्युवाच
यदि त्वमीश्वरस्तात राज्ञो वित्तस्य भार्गव।
नाभिजानामि तत् तेऽहं राजा तु वदतु स्वयम्॥ १४॥
अनुवाद
तब देवयानी बोली - "पिताजी! यदि आप राजा के धन के स्वामी हैं, तो आपके ऐसा कहने मात्र से मैं विश्वास नहीं करूँगी। यदि राजा स्वयं ऐसा कहें, तो मैं विश्वास करूँगी।"
Then Devayani said - Father! If you are the owner of the king's wealth, then I will not believe it because you say so. If the king himself says it, then I will believe it. 14.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥