श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.80.12 
शुक्र उवाच
यत् किंचिदस्ति द्रविणं दैत्येन्द्राणां महासुर।
तस्येश्वरोऽस्मि यद्येषा देवयानी प्रसाद्यताम्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले - हे दैत्यराज! यदि मैं दैत्य राजाओं के समस्त धन और वैभव का स्वामी हूँ, तो उससे इस देवयानी को प्रसन्न करो।॥12॥
 
Shukracharya said - O great demon! If I am the owner of all the wealth and splendor of the demon kings, then please this Devayani with it. ॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)