Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.80.10: तुम देवयानी को प्रसन्न करो, क्योंकि उसमें मेरे प्राण बसते हैं। जब वह प्रसन्न हो जाएगी, तब मैं इन्द्र के पुरोहित बृहस्पति की भाँति तुम्हारा कल्याण करूँगा।॥10॥ | mahabharat अध्याय 1.80: शुक्राचार्यका वृषपर्वाको फटकारना तथा उसे छोड़कर जानेके लिये उद्यत होना और वृषपर्वाके आदेशसे शर्मिष्ठाका देवयानीकी दासी बनकर शुक्राचार्य तथा देवयानीको संतुष्ट करना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
प्रसाद्यतां देवयानी जीवितं यत्र मे स्थितम्।
योगक्षेमकरस्तेऽहमिन्द्रस्येव बृहस्पति:॥ १०॥
अनुवाद
तुम देवयानी को प्रसन्न करो, क्योंकि उसमें मेरे प्राण बसते हैं। जब वह प्रसन्न हो जाएगी, तब मैं इन्द्र के पुरोहित बृहस्पति की भाँति तुम्हारा कल्याण करूँगा।॥10॥
You please Devayani, because my life resides in her. When she is pleased, I will take care of your welfare like Brihaspati, the priest of Indra.॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥