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mahabharat 1.8.26-27: वे सब लोग उस कन्या को सर्प के विष से मरते देखकर करुण विलाप करने लगे। रुरु अत्यन्त दुःखी होकर वहाँ से चले गए और अन्य सभी ब्राह्मण उस समय वहीं बैठे रहे॥ 26-27॥   |   mahabharat अध्याय 1.8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु  »  श्लोक 26-27
 
 
श्लोक  1.8.26-27 
तां ते कन्यां व्यसुं दृष्ट्वा भुजङ्गस्य विषार्दिताम्॥ २६॥
रुरुदु: कृपयाविष्टा रुरुस्त्वार्तो बहिर्ययौ।
ते च सर्वे द्विजश्रेष्ठास्तत्रैवोपाविशंस्तदा॥ २७॥
 
 
अनुवाद
वे सब लोग उस कन्या को सर्प के विष से मरते देखकर करुण विलाप करने लगे। रुरु अत्यन्त दुःखी होकर वहाँ से चले गए और अन्य सभी ब्राह्मण उस समय वहीं बैठे रहे॥ 26-27॥
 
All those people started crying in pity on seeing that girl dying due to the poison of the snake. Ruru went out of the place in great sorrow and all the other Brahmins remained sitting there at that time.॥ 26-27॥
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि पौलोमपर्वणि प्रमद्वरासर्पदंशेऽष्टमोऽध्याय:॥ ८॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत पौलोमपर्वमें प्रमद्वराके सर्पदंशनसे सम्बन्ध रखनेवाला आठवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ ८॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका श्लोक मिलाकर कुल २७श्लोक हैं)
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)