श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 8: प्रमद्वराका जन्म, रुरुके साथ उसका वाग्दान तथा विवाहके पहले ही साँपके काटनेसे प्रमद्वराकी मृत्यु  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.8.13 
प्रमदाभ्यो वरा सा तु सत्त्वरूपगुणान्विता।
तत: प्रमद्वरेत्यस्या नाम चक्रे महानृषि:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वह बुद्धि, सौन्दर्य और समस्त उत्तम गुणों से विभूषित, संसार की समस्त प्रमदाओं (सुन्दरी स्त्रियों) से श्रेष्ठ प्रतीत होती थी; इसीलिए महर्षि ने उसका नाम 'प्रमद्वारा' रखा॥13॥
 
She seemed to be superior to all the Pramadas (beautiful women) of the world, adorned with intelligence, beauty and all the best qualities; That's why Maharishi named it 'Pramdwara'. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)