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mahabharat 1.79.11: जो महात्मा अच्छे आचरण, आचरण और कुलीनता की प्रशंसा करते हैं, उनके बीच में रहना चाहिए और वही रहने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है ॥11॥   |   mahabharat अध्याय 1.79: शुक्राचार्यद्वारा देवयानीको समझाना और देवयानीका असंतोष   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 79: शुक्राचार्यद्वारा देवयानीको समझाना और देवयानीका असंतोष  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.79.11 
ये त्वेनमभिजानन्ति वृत्तेनाभिजनेन वा।
तेषु साधुषु वस्तव्यं स वास: श्रेष्ठ उच्यते॥ ११॥
 
 
अनुवाद
जो महात्मा अच्छे आचरण, आचरण और कुलीनता की प्रशंसा करते हैं, उनके बीच में रहना चाहिए और वही रहने के लिए सर्वश्रेष्ठ स्थान है ॥11॥
 
One should live among those saints who praise good behaviour, conduct and nobility and that is the best place to live. ॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)