Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.79.10: कल्याण चाहने वाले विद्वान पुरुष को उन पापबुद्धि मनुष्यों के बीच नहीं रहना चाहिए जो दूसरों के अच्छे आचरण और कुल की निन्दा करते हैं ॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.79: शुक्राचार्यद्वारा देवयानीको समझाना और देवयानीका असंतोष   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 79: शुक्राचार्यद्वारा देवयानीको समझाना और देवयानीका असंतोष  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.79.10 
पुमांसो ये हि निन्दन्ति वृत्तेनाभिजनेन च।
न तेषु निवसेत् प्राज्ञ: श्रेयोऽर्थी पापबुद्धिषु॥ १०॥
 
 
अनुवाद
कल्याण चाहने वाले विद्वान पुरुष को उन पापबुद्धि मनुष्यों के बीच नहीं रहना चाहिए जो दूसरों के अच्छे आचरण और कुल की निन्दा करते हैं ॥10॥
 
A learned man who desires welfare should not be among those sinful minded people who criticise the good conduct and family of others. ॥10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)