Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.9: शर्मिष्ठा बोली, 'अहा! जब मेरे पिता बैठे या सो रहे होते हैं, तब तुम्हारे पिता नीचे एक विनम्र सेवक की तरह खड़े रहते हैं और बार-बार कैदी की तरह उनकी स्तुति करते हैं। | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
शर्मिष्ठोवाच
आसीनं च शयानं च पिता ते पितरं मम।
स्तौति वन्दीव चाभीक्ष्णं नीचै: स्थित्वा विनीतवत्॥ ९॥
अनुवाद
शर्मिष्ठा बोली, 'अहा! जब मेरे पिता बैठे या सो रहे होते हैं, तब तुम्हारे पिता नीचे एक विनम्र सेवक की तरह खड़े रहते हैं और बार-बार कैदी की तरह उनकी स्तुति करते हैं।
Sharmishtha said, 'Oh! When my father is sitting or sleeping, your father stands below like a humble servant and repeatedly praises him like a prisoner.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥