Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.8: देवयानी बोली, "हे राक्षस पुत्री! मेरी शिष्या होकर तुम मेरे वस्त्र कैसे ले रही हो? तुम सज्जनों के सदाचार से रहित हो, अतः यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा।" | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
देवयान्युवाच
कस्माद् गृह्णासि मे वस्त्रं शिष्या भूत्वा ममासुरि।
समुदाचारहीनाया न ते साधु भविष्यति॥ ८॥
अनुवाद
देवयानी बोली, "हे राक्षस पुत्री! मेरी शिष्या होकर तुम मेरे वस्त्र कैसे ले रही हो? तुम सज्जनों के सदाचार से रहित हो, अतः यह तुम्हारे लिए अच्छा नहीं होगा।"
Devayani said, "Oh daughter of a demon! Being my disciple how are you taking my clothes? You are devoid of the good conduct of gentlemen, therefore it will not be good for you."
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥