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mahabharat 1.78.40: मैं ही लोकों के कल्याण के लिए वर्षा करने वाला हूँ और मैं ही समस्त औषधियों का पोषण करने वाला हूँ; मैं तुमसे सत्य कहता हूँ ॥40॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.78.40 
अहं जलं विमुञ्चामि प्रजानां हितकाम्यया।
पुष्णाम्योषधय: सर्वा इति सत्यं ब्रवीमि ते॥ ४०॥
 
 
अनुवाद
मैं ही लोकों के कल्याण के लिए वर्षा करने वाला हूँ और मैं ही समस्त औषधियों का पोषण करने वाला हूँ; मैं तुमसे सत्य कहता हूँ ॥40॥
 
I am the one who rains for the welfare of the people and I am the one who nourishes all the medicines; I am telling you the truth. ॥ 40॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)