Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.78.39: ब्रह्माजी ने प्रसन्न होकर मुझे वरदान दिया है; जिसके अनुसार इस पृथ्वी, स्वर्ग और समस्त प्राणियों में जो कुछ है, उसका मैं सनातन स्वामी हूँ ॥39॥ | mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यच्च किंचित् सर्वगतं भूमौ वा यदि वा दिवि।
तस्याहमीश्वरो नित्यं तुष्टेनोक्त: स्वयम्भुवा॥ ३९॥
अनुवाद
ब्रह्माजी ने प्रसन्न होकर मुझे वरदान दिया है; जिसके अनुसार इस पृथ्वी, स्वर्ग और समस्त प्राणियों में जो कुछ है, उसका मैं सनातन स्वामी हूँ ॥39॥
Brahmaji, being pleased, has granted me a boon; according to which, I am the eternal master of all that is on this earth, in the heavens and among all living beings. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥