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mahabharat 1.78.38: वृषपर्वा, देवराज इन्द्र और राजा ययाति यह जानते हैं। द्वंद्वरहित, अचिन्त्य ब्रह्म ही मेरी प्रबल शक्ति है। 38॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  1.78.38 
वृषपर्वैव तद् वेद शक्रो राजा च नाहुष:।
अचिन्त्यं ब्रह्म निर्द्वन्द्वमैश्वरं हि बलं मम॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
वृषपर्वा, देवराज इन्द्र और राजा ययाति यह जानते हैं। द्वंद्वरहित, अचिन्त्य ब्रह्म ही मेरी प्रबल शक्ति है। 38॥
 
Vrishparva, Devraj Indra and King Yayati know this. The conflictless, unthinkable Brahma is my powerful force. 38॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)