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mahabharat 1.78.37: शुक्राचार्य बोले- देवयानी! तुम किसी की स्तुति करने वाले, याचना करने वाले या भिक्षा लेने वाले की पुत्री नहीं हो। तुम तो ऐसे पवित्र ब्राह्मण की पुत्री हो जो किसी की स्तुति नहीं करता और जिसकी सब लोग स्तुति करते हैं॥ 37॥   |   mahabharat अध्याय 1.78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 78: देवयानी और शर्मिष्ठाका कलह, शर्मिष्ठाद्वारा कुएँमें गिरायी गयी देवयानीको ययातिका निकालना और देवयानीका शुक्राचार्यजीके साथ वार्तालाप  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  1.78.37 
शुक्र उवाच
स्तुवतो दुहिता न त्वं याचत: प्रतिगृह्णत:।
अस्तोतु: स्तूयमानस्य दुहिता देवयान्यसि॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
शुक्राचार्य बोले- देवयानी! तुम किसी की स्तुति करने वाले, याचना करने वाले या भिक्षा लेने वाले की पुत्री नहीं हो। तुम तो ऐसे पवित्र ब्राह्मण की पुत्री हो जो किसी की स्तुति नहीं करता और जिसकी सब लोग स्तुति करते हैं॥ 37॥
 
Shukracharya said— Devayani! You are not the daughter of a person who praises, begs or accepts alms. You are the daughter of a holy Brahmin who does not praise anyone and whom everyone praises.॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)